Sunday, Jan 20, 2019

लालकृष्ण आडवानी का ये कैसा दुर्भाग्य

नई दिल्ली। क्या पीएम इन वेटिंग रहे लालकृष्ण आडवाणी अब प्रेसीडेंट इन वेटिंग रह जाएंगे? ये सवाल इसलिए क्योंकि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में अहम फैसला सुनाया उसका सीधा असर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी पर जरूर होगा।सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंश मामले में अहम फैसला सुनाते हुए भाजपा के बड़े नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 भाजपा नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत धारा 120 बी के तहत मामला चलाए जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए, इसके लिए कोर्ट ने बकायदा दो साल का समय निर्धारित किया गया है। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से आडवाणी के राष्ट्रपति बनने की संभवानों को झटके के तौर पर देखा जा रहा है।भारतीय राजनीति में बीजेपी की खड़ा करने में 89 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी का रोल बेहद अहम रहा है। 90 के दशक में उन्होंने राम मंदिर का मुद्दा उठाया और बीजेपी को मजबूती देने की कवायद में जुट गए। ये आडवाणी ही थे जिन्होंने राम मंदिर मुद्दे को आधार बनाकर 1990 में राम रथ यात्रा शुरू की। उन्होंने राम रथ यात्रा का नेतृत्व खुद किया।आडवाणी की कोशिशों का ही असर था कि बीजेपी उस समय काफी मजबूती से आगे बढ़ी। स्थितियां बदलने लगी और साल दर साल बीजेपी के प्रदर्शन का ग्राफ भी आगे बढ़ता रहा। एक समय वह भी आया जब बीजेपी ने केंद्र में सरकार बनाई। उस समय ऐसे कयास लग रहे थे कि लालकृष्ण आडवाणी पीएम बन सकते हैं हालांकि बीजेपी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।2004 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। साल 2004 के बाद हुए लोकसभा चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी ही बीजेपी की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार रहे। हालांकि बीजेपी को जीत नहीं मिली। आखिर में 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के सीएम रहे नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया गया। उनके नेतृत्व में पार्टी की लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हुई, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पीएम इन वेटिंग ही रहे। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मीडिया में खबरें चली की लालकृष्ण आडवाणी का राष्ट्रपति बनाया जाएगा। हालांकि अब जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उन पर आपराधिक साजिश के तहत धारा 120 बी के तहत मामला चलाए जाने का आदेश दिया, उसके बाद उनके राष्ट्रपति बनाए जाने को लेकर भी संदेह के बादल घिर गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले में अगले दो साल में सुनवाई पूरी होने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई जल्द पूरी हो ये भी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने की है। सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद अब इस बात की संभावना कम ही है कि लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति की रेस में होंगे।

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