Sunday, Jan 20, 2019

अखिलेश को क्यों पसंद हैं रामगोविन्द

लखनऊ। राम गोविंद चौधरी आठ बार के विधायक हैं और उन्हें अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है, अखिलेश सरकार में वह बेसिक शिक्षा मंत्री थे, इसके अलावा वह बाल विकास मंत्री भी रहे। आजम खान अखिलेश सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे ।राम गोविंद चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और पहली बार वह 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से जीतकर आए थे। इस बार वह बलिया के बाँसडीह सीट से जीतकर आए हैं। जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर के साथ इनके पास काम करने का अनुभव है। आपात काल में राम गोविंद चौधरी 1977 में जेल भी गए थे। मौजूदा समय में राम गोविंद चौधरी से ज्यादा किसी भी विधायक के पास अनुभव नहीं है। 1977 में राम गोविंद चौधरी, राजेंद्र चौधरी और राजनाथ सिंह पहली बार चुनकर आए थे। राम गोविंद चौधरी को उनके बागी और अख्खड़ स्वभाव के लिए जाना जाता है, ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है तीन चौथाई बहुमत वाली भाजपा के सामने मजबूत विपक्ष के नेता की भूमिका निभाना। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे इतने बड़े बहुमत के सामने अपनी उपयोगिता साबित कर पाते हैं।1971-72 में बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय से पढ़ाई के दौरान वह महामंत्री चुने गए और इसके बाद वह अध्यक्ष भी बने। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने जेपी आंदोलन में अपनी भूमिका दी और छात्रों के लिए वह इस आंदोलन में कूद गए। 1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 19 महीने तक उन्हें जेल में रहना पड़ा। लेकिन जेल से छूटने के बाद वह चुनावी मैदान में कूदे और पहली बार चिलकहर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे, उस समय वह चंद्रशेखर की जनता पार्टी के सदस्य थे। चंद्रशेखर को ही वह अपना राजनीतिक गुरु भी मानते हैं।लेकिन 2002 में जब वह समाजवादी जनता पार्टी से विधायक चुने गए तो उन्होंने मुलायम सिंह का दामन थामा और उनके साथ लंबे समय तक अपनी सियासी पारी को आगे बढ़ाया। बांसडीह से भी वह तीन बार विधायक रहे। विपक्ष का नेता चुने जाने पर राम गोविंद चौधरी कहते हैं कि हम सदन में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे। हम जनहित के मुद्दों को सकारात्मक तरीके से उठाएंगे और सरकार से जनता से जुड़े हर सवाल पूछे जाएंगे। फिलहाल हम सरकार के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

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